बुधवार, 8 अगस्त 2007

टुच्चे लोग-टुच्ची बातें

सुबह-सुबह मोबाइल की मैसेज टोन सुनाई दी। देखा तो हैप्पी बर्थडे का मैसेज था। याद आया अरे आज तो हमारा जन्मदिन है। ये मोबाइल भी क्या चीज है। हमें वक्त पर याद दिला दिया हमारे जन्मदिन के बारे में। मैसेज भेजने वाले से ज्यादा हम मोबाइल के शुक्रगुजार थे। वो इसलिये कि हम यकीन के साथ कह सकते हैं कि अगर उन जनाब के पास मोबाइल नहीं होता तो शायद ही वो हमें जन्मदिन की बधाई देते। क्या पता मैसेज भेजने में जो एक अदद रुपये खर्च होते हैं वो भी उन्होंने खर्च न किये हों। अरे आजकल तो मोबाइल कंपनियां फ्री मैसेज की सुविधा देने लगी हैं...अब आप लोग सोचेंगे कि भइया हम तो बड़ी ही नकारात्मक सोच वाले शख्स हैं। क्या करें हमारी सोच ऐसी हो ही गई है। फिलहाल हमारे दिमाग में इसकी दो वजह आ रही हैं।

पहली तो ये कि हमें जन्मदिन की शुभकामना भेजने वाले को हमसे कोई दिली या भावनात्मक लगाव नहीं है, यह हम अच्छी तरह जानते हैं। जब उन जनाब को हमसे कोई काम होता है या उनका कोई स्वार्थ निकलना होता है तभी वो इस नाचीज को याद करते हैं। हमें पूरा यकीन है कि आज-कल में उनका फोन जरूर आ जायेगा...रवीन्द्र जी आप दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ को जानते हैं क्या? एक बार उनसे बोल दीजिये मेरे भतीजे ने अभी जर्नलिज्म का कोर्स पूरा किया है, उसकी नौकरी लगवानी है। ऐसे मतलबी और स्वार्थी (वैसे आजकल ऐसे लोगों को स्मार्ट कहा जाता है) लोगों ने ही हमारी सोच नकारात्मक बना दी है।

अब दूसरी वजह। दूसरी वजह है हमारा काम। पिछले करीब दो साल से खबरिया चैनल के क्राइम बुलेटिन के लिये स्क्रिप्ट लिखते-लिखते हमारी सोच पूरी तरह निगेटिव हो गई है। हालत ये है कि अब हमें हरेक शख्स क्रिमिनल नजर आता है। यहां तक कि आफिस में भी हमें हर कोई किसी न किसी साजिश का सूत्रधार नजर आता है। (वैसे यह सच भी हो सकता है) रात को आफिस से घर लौटते हैं तो रास्ते भर यही डर सताता रहता है कि कहीं कोई मारपीट कर हमारी गाड़ी और कीमती मोबाइल न छीन ले। लो भई, तो घूमफिर कर बात फिर मोबाइल तक आ गई। गाड़ी मोबाइल छिनने का डर इस कदर रहता है कि हम रोज रास्ता बदल-बदल कर घर जाते हैं। अरे फर्ज कीजिये कि अगर किसी ने हमारा मोबाइल छीन लिया तो हमारा आर्थिक नुकसान तो होगा जो होगा...सबसे बड़ी बात कि हम अपने शुभचिंतकों (?) से कट जायेंगे। फिर भला हमारे पास ये संदेश कैसे पहुंचेगा कि भइया आज ही के दिन आप इस दुनिया में अवतरित हुये थे इसलिये बधाई स्वीकार करें। अगर मोबाइल पास नहीं रहेगा तो रिपोर्टर हमें कैसे बता पाएगा कि सुबह-सुबह पूरी दिल्ली सिर्फ इसलिये दहल गई कि एक घर में दो कत्ल हो गये। वैसे यह हमें आज तक समझ में नहीं आया कि घर के अंदर एक कत्ल होने पर ये चैनल वाले पूरी दिल्ली को ही कैसे दहला देते हैं? या फिर चलती कार में बलात्कार (बाद में खबर कुछ और ही होती है) की खबर पीट-पीटकर वो यह कैसे साबित कर देते हैं कि दिल्ली महिलाओं के लिये असुरक्षित है। बहरहाल, हमें तो इंतजार उस दिन का है जब चैनल वाले उस शहर का नाम बतायेंगे जो महिलाओं के लिये सुरक्षित है। क्योंकि चैनल वालों की सोच भी एक टुच्चे से क्राइम रिपोर्टर की तरह ही नकारात्मक है...और जहां तक मेरा सवाल है तो मेरे बॉस तो कहते ही हैं...रवीन्द्र रंजन तुम बहुत टुच्चे आदमी हो।

9 comments:

Ashok Kaushik ने कहा…

इस रंग बदलती दुनिया में इतना संजीदगी से सोचिएगा तो ब्रेनहेमरेजवा हो जाएगा रवींद्र जी।
बेवजह दिल पे कोई बोझ ना भारी रखिये
जिंदगी जंग है, इस जंग को जारी रखिये..

उन्मुक्त ने कहा…

चलिये जन्म दिन की शुभकामनायें तो स्वीकार कर ही लीजिये।

अजित वडनेरकर ने कहा…

sahi kahaa बेवजह दिल पे कोई बोझ ना भारी रखिये.
mast rahuye.

Mired Mirage ने कहा…

जन्मदिन की शुभकामनाएँ ।
घुघूती बासूती

अनूप शुक्ला ने कहा…

जन्मदिन मुबारक!

mamta ने कहा…

जन्मदिन की बधाई और शुभकामनायें !!
कुछ निगेटिव सोचने की जरुरत नही है:)

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

जन्मदिन की शुभकामनाएं रवीन्द्र जी! इस भय के साथ कि आप मेरे लिये भी वो सब सोच सकते हैं जो उन बेचारे सज्जन के लिये सोचा जिन्होने आपको शुभकामनाएं देने की ज़ुर्रत की फिर भी दुस्साहस कर ही लेती हूँ और हाँ ! ये सच है कि अपना व्यवसाय अपने व्यक्तित्व पर असर दिखाये ये तो स्वाभाविक सी बात है, परंतु यदि वो चरित्र पर हावी होने लगे तो ये चिन्ता की बात है!

एक बात और कहूँगी, जो सचमुच नकारात्मक प्रवृत्ति के होते है, उन्हे सब कहते हैं पर वे स्वयं नही समझ पाते अपना पाते अपना व्यक्तित्व परंतु आप कई बार आत्मविशलेषण करते मिलते हैं, चिंता मत कीजिये आपकी आत्मा आपको नकारात्मक नही होने देगी।

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

मेरे ब्लाग पर आने के लिये सभी साथियों का धन्यवाद। दोस्तों ऐसा नहीं है कि मैं हमेशा निगेटिव ही सोचता हूं। कुछ लोग हैं जो मुझे ऐसा सोचने को मजबूर कर देते हैं, लेकिन मुझे खुशी है कि मेरे साथ आप जैसे लोगों का समर्थन भी है जो मुझे हमेशा कुछ न कुछ रचनात्मक करने की प्रेरणा देता रहता है।
कंचन जी, मैं इतना भी बुरा नहीं हूं कि जन्मदिन की बधाई देने पर आपके बारे में भी वैसी राय बनाऊं जैसी मैंने उन महाशय के बारे में बना रखी है। अब तो मैं सोच रहा हूं कि उन महाशय के बारे में किसी दिन विस्तार से लिखूं ताकि आप लोग भी उनकी खूबियों से वाकिफ हो जायें। एक बार फिर बहुत-बहुत शुक्रिया। मेरे ब्लाग पर आते रहियेगा।

rakhi ने कहा…

ravindra ji Namaskar, janmdin ki hardik shubhkamnae, vilamb se subhkamna preshit karne ke liye shamaprarthi hoon. aapki site dekhi.kafi gambhir aur sarthak chintan hai. khaskar aapka vyang tuchche log tuchchi baatee marmsparshi hai. akhaari duniya aur channel mein ek patrkar ki antarvyatha aur patrkaro ke swarthi charitra ko aapne sahah dhang se abhivyakt kiya hai. channels par aaj jin vishyon ko tarjih di ja rahi hai vo nishchit roop se aadarsh patrakarita ke manakon ke pratikuul hai lekin iske liye patrakar bhi kam jimmedar nahin hain jo aaj sirf dhasnarjan ke liye patrakarita kar rahe hai.

 
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